Horoscope Defects – How To Put A Break In Marriage आज कल हिन्दू लोग कुंडली को बहुत महत्तव देते है| व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की शुभ-अशुभ स्थिति होती है उसी तरह उसके जीवन में यह स्थितियाँ एक एहम रूप लेती है| मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके जीवन में प्रभाव डालती है|

शादी के बंधन में बंधने से पहले युवक और युवती की कुंडली मिलायी जाती है और 36 गुणों का विख्यात किया गया है जो की दो लोगो की कुंडली में अंतर बताते है| 36 गुणों में से 18 गुण एक वर वधु के जीवन को खुशहाल और सुखमय बनाने के लिए अनिवार्य है|

कुंडली में दोष होना एक गंभीर स्थिति है उनके लिए जो की शादी के बंधन में बंधना चाहते है| कुंडली दोष उनकी जिंदगी में परेशानियों का कारण बन सकती है|

कुंडली दोष

मंगल दोष

कुण्डली में जब प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है तब मंगलिक दोष लगता है| इस दोष को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है| यह दोष जिनकी कुण्डली में हो उन्हें मंगली जीवनसाथी ही तलाश करनी चाहिए ऐसी मान्यता ह| ज्योतिशास्त्र में कुछ नियम बताए गये हैं जिससे वैवाहिक जीवन में मांगलिक दोष नहीं लगता है|

मंगल दोष के प्रभाव से शादी में रूकावट आ सकती है, जीवनसाथी की मृत्यु हो सकती है और वर वधु को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है|

जिनकी कुंडली में मंगल दोष है और वह 28 वर्ष की आयु होने के बाद विवाह करते है तो मंगल दोष का दुष्प्रभाव उनके विवाहित जीवन पर नहीं पड़ता|

निवारण- मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में पताशे चढ़ाये और उसे बहते पानी और नदी में डाल दे इसे मंगल दोष से बचा जा सकता है और बिखरियों को मीठी रोटी अवशय खिलाए| बरगद के पेड़ की जड़ और मिटटी में मीठा दूध मिलाये और थोड़ा सा सेवन कर ले|

मंगला गौरी और वट सावित्री का व्रत रखने से भी लाभ मिलता है|

नाड़ी दोष

नाड़ी मूल रूप से संतान से संबंधित है, इसलिए इसके महत्व को समझा जा सकता है। नाड़ी मिलान के दौरान अगर नाड़ी 0 अंक दिखाता है, तो नाड़ी दोष बनता है। कुंडली मिलाने पर अगर पुरुष और महिला की नाड़ियाँ अलग हैं, तो 8 अंक जोड़ा जाता है और अगर दोनों कुंडली में एक ही नाड़ियाँ हैं, तो नाड़ी दोष बनता है और कोई अंक नहीं जोड़ा जाता है|

नाड़ी दोष के प्रभाव- विवाहित जोड़ो में अनबन, उनके जीवन में रूखापन आना और सुखमय जीवन में परेशानियां आना |

भाकुत दोष

ज्योतिशास्त्र के अनुसार अगर पुरुष और महिला की कुंडली में चन्द्रमा 6-8, 9-5 और 12-2 अंको में है तो उसे भाकुत दोष कहते है| अगर पुरुष का चंद्र राशि मेष है और महिला का कन्या है, तब 6-8 का भाकूत दोष बनता है, क्योंकि स्त्री का चंद्र राशि नर के चंद्र राशि से छठे और नर का चंद्र राशि स्त्री के चंद्र राशि से आठवें नंबर पर होता है। इसी तरह का भाकूत दोष चंद्र राशि के 9-5 और 12-2 संयोजन के लिए भी माना जाता है।

6-8 का भाकूत दोष शादी जोड़ो के लिए स्वास्थ्य की गंभीर समस्या पैदा कर सकता है, 9-5 का भाकूत दोष संतान की समस्या का कारण होता है और 12-2 का भाकूत दोष वित्तीय समस्याएं पैदा करता है।

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